Sifarnama | सिफ़रनामा (Hindi) Edition by Anil Jeengar (Author) By Manjul Publishing House
‘सिफ़रनामा’ – ये एक सफ़र है, मेरे होने से मेरे न होने तक का। मैं हूँ और मैं नहीं भी हूँ। मैं मिला भी हूँ और मैं खोया हुआ भी हूँ। ये मेरी तलाश कुछ पाने की नहीं, स़िर्फ ख़ुद को खो देने की है। ये कविताएँ, ये नज़्में किसी एक कैनवास में बँधी हुई नहीं हैं – ये आज़ाद हैं, ये साँस लेती हुई हैं। ये और साँस लेंगी, जब ये आप तक पहुँचेंगी, आपके ज़ेहन को छुएँगी और आप में जज़्ब हो जाएँगी। फिर मेरा कुछ नहीं रहेगा। मेरा होना वैसे भी कोई मायने नहीं रखता। क्योंकि ‘न होना’ ही तो ‘सिफ़र’ तक की यात्रा है। इन कविताओं में आपको जीवन के सारे रंग देने भर की कोशिश है। कुछ मेरे अनुभव हैं और कुछ जो मैंने दूसरों से चुराए हैं। किसी दूसरे के पैरों में अपने पाँव डालकर चलना, उसका दर्द महसूस करना – ये भी तो इस यात्रा का हिस्सा रहा है। ये कविताएँ जो मैं सालों से लिखता रहा हूँ, समय-समय पर उन्हें ख़ुद से दूर करता रहा हूँ – जैसा मैं प्रेम के साथ करता हूँ। अकेलेपन की अपनी ही प्यास है, और इस प्यास के बीच कभी-कभी मैं ख़ुद भी आ जाता हूँ। मेरे और अकेलेपन के दरमियान कई बार मैं ख़ुद ही लगता हूँ। ये कविताएँ उसी एकांत से जन्मी हैं, जिस पल मैं भी गुम हो गया था। ये मेरे ज़रिये उतरी हैं – ये मैंने लिखी या नहीं, पता नहीं। ये बस उतरी हैं – जैसे बादलों से बारिश गिरती है, ये भी वैसे ही गिरी हैं मुझ पर। मैं भी आपकी ही तरह इनका पहली बार पाठक बना था। मैंने इन्हें जी लिया था, जब ये लिखी गई थीं। मैंने उस शून्य को छुआ था, जहाँ से ये सारा खेल शुरू हुआ है। -अनिल जीनगर
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